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Buy Back of Share Procedure

Buy back of share procedure- शेयर buy back वह प्रक्रिया होती है जिसमें कंपनी अपने ही शेयर्स को स्वयं खरीद लेती है, परंतु कंपनी अपने share को एक निवेशक के तौर पर नहीं खरीद सकते है। कंपनी के ऐसा करने के अलग-अलग reasons होते हैं, परंतु कंपनी डायरेक्ट अपने शेयर्स को नहीं खरीद सकती, उसे एक्ट के तहत एक प्रक्रिया को follow करना पड़ता है। आइए विस्तार पूर्वक जाने कि ये एक्ट क्या है? और buy back of share procedure कैसा रहता है? 

Buy back के प्रकार

Buy back के प्रकार
types of buy back in shares

Buy back 4 प्रकार के होते हैं:-

  1. Tender offer
  2. Open market ( stock exchange mechanism ) 
  3. निर्धारित कीमत tender offer
  4. डच नीलामी tender offer

Tender offer

Tender offer के अनुसार कंपनी  एक fixed time period के अंदर 1 रेशों पर आधारित मौजूदा share holders से अपने shares वापस खरीदती है। 

Open market ( stock exchange mechanism) 

इस प्रकार के ऑफर में कंपनी direct अपने shares market से वापस खरीदती है। Buy back  के इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में shares को वापस buy किया जाता है। एक समय के दौरान comapny के दलालों के माध्यम से execute किया जाता है। 

निर्धारित कीमत tender offer

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भारत में इस share buy back के माध्यम से कंपनी एक tender के माध्यम से share holder  तक पहुंचती है। ऐसे share holders जो अपने shares को बेचना चाहते हैं। वह उन्हें sell करने के लिए comapny में जमा कर देते हैं। जैसा कि नाम से भी स्पष्ट है कि इन शेयर की कीमत कंपनी के द्वारा निर्धारित की जाती है और यह current price rate से अधिक ही होती है। इस प्रकार का टेंडर ऑफर एक स्पेशल टाइम पीरियड के लिए होता है और इसका टाइम पीरियड काफी कम होता है। 

डच नीलामी Tender Offer

इस प्रकार का टेंडर काफी हद तक निर्धारित tender offer के कुछ similar होता है। निर्धारित टेंडर ऑफर मे share holder को एक fix rate कंपनी के द्वारा दी जाती है। जबकि डच नीलामी tender offer मे company के द्वारा share holder को अनेक किमते दी जाती है, जिनमें से शेयर होल्डर अपनी इच्छा के अनुसार कीमत को चुन सकते हैं। 

इस समय जो कीमत कंपनी के द्वारा दी जाती है उस में से सबसे कम कीमत भी share के current market price से अधिक होती है। 

शयरों के वापसी की प्रक्रिया

Shares का बाय बैक एक corporate action event है।  जिसमें एक कंपनी मौजूदा share holders से या तो tender  ऑफर के माध्यम से या open market के माध्यम से अपने शेयर वापस खरीदती है। Shares का buy back कंपनी मुक्त भंडारण या प्रतिभूति premium  account से बाहर हो सकता है। आइए आगे के  लेख में हम जानते हैं कि shares के वापसी की प्रक्रिया किस प्रकार से रहती है:-

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  1. Buy back करने के लिए सबसे पहला कदम होता है board meeting. कंपनी बोर्ड मीटिंग मे buy back के प्रस्ताव को मंजूरी देती है। 
  2. उसके बाद कंपनी buy back के लिए सार्वजनिक घोषणा public announcement करती है। इस घोषणा में buy back करने के तरीके को बताया जाता है यानी कि company किस प्रकार के tender offer के जरिये buy back करेगी। 
  3. फिर कंपनी निविदा प्रस्ताव के मामले में SEBI के पास प्रस्ताव पत्र दाखिल करती है। 
  4. Share holders  जो buy back  के लिए इच्छुक होते हैं वह अपने tender करने के लिए अपने stock  broker के माध्यम से या फिर open market की offer के मामले में buy back  के लिए अपनी बोली लगाते हैं। 
  5. Stock broker  तब निविदा प्रस्ताव के मामले में company registrar को निविदा फॉर्म और अन्य विशेष documents जैसे physical शेयर प्रमाण पत्र submit करते हैं। 
  6. रजिस्ट्रार का काम उन सभी निविदा प्रपत्र की verification करना होता है। पुष्टि करने के बाद registrar निविदा equity शेयरों के acceptance पर exchange को इनफॉर्म करता है। 
  7. ऐसे share जो गैर स्वीकृत हो, वह share holders को वापस करती है।
  8. ओपन मार्केट की offer में share की स्वीकृति order matching पर होती है और संबंधित pay out बताई गई तिथियों पर एक execute होती है। 
  9. जब शेरहोल्डर्स के शेयर accept हो जाते हैं तो बाय-back में पेश किए गए ऑफर के अनुसार शेयरधारकों को shares के बदले में राशि प्राप्त होता है। 
  10. अंत में, buy back में खरीदी गई प्रतिभूतियां कंपनी द्वारा नष्ट कर दी जाती है। 

Share buy back करने से company को होने वाला लाभ

  • बाय बैक share की कीमतों को बढ़ाने में मददगार होता है, जिससे कि undervalue stock की कीमतों में काफी बढ़िया सुधार होता है। 
  • Buy back कंपनी की पर share आय, संपत्ति पर return, equity पर रिटर्न अर्थात कंपनी के प्रमुख financial अनुपात में सुधार करता है। 
  • Buy back  नेशनल कंपनी law ट्रिब्यूनल कोर्ट से अनुमोदन की आवश्यकता के बिना ही capital मे कमी के optional तरीके के रूप में काम करता है। 
  • बाय बैक कंपनी के लिए एक  वित्तीय इंजीनियरिंग उपकरण के रूप में काम करता है, क्योंकि यह पूंजी संरचना को अनुकूलित करने के लिए responsible बन जाता है। 
  • यह एक रक्षा रणनीति भी है, यह शत्रुता अधिग्रहण को रोकने के लिए मददगार होती है। 
  • बाय बैक under value stock  के share holders के लिए निकलने का एक आसान रास्ता प्रदान करते हैं। 
  • बाय बैक इन वेस्ट केके ऑप्शंस के साथ मुक्त नकटी के इष्टतम उपयोग में मदद करता है। 
  • बाय बैक कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटस पर स्वस्थ जांच के रूप में कार्य करता है। क्योंकि अच्छी तरलता वाली कंपनियों को ही buy back  करने की announcement करने की अनुमति होती है। 

Conclusion-

आज के इस लेख में हमने buy back of share procedure के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्राप्त की है। उम्मीद है इस लेख को पढ़ने के बाद आपको buy back of share procedure के बारे में सभी जानकारी मिल पाई होगी।

यदि अब भी आपके मन मे कोई सवाल है जो आप हमसे पूछना चाहते हैं तो कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते हैं। जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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