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What is PMS in Share Market

what is PMS in share market: अक्सर नए निवेशक जब शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो वे अपने रिस्क प्रोफाइल को सही ढंग से नहीं पहचान पाते या उसका अनुमान नहीं लगा पाते हैं। और ना ही निवेशक अपने पोर्टफोलियो के निर्माण के लिए उपयुक्त निवेश चुन पाते हैं। 

इसके लिए निवेशकों को PMS का विकल्प चुनने के लिए कहा जाता है। लेकिन निवेशक यह नहीं जानते हैं कि what is pms in share market जिसके कारण वे अपने पोर्टफोलियो के लिए इस विकल्प को चुनने से कतराते हैं।

लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज के इस लेख में हम what is pms in share market के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त करने वाले हैं लिस्ट ऑफ और साथ ही हम जानेंगे की शेयर मार्केट में PMS की क्या भूमिका होती है। 

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PMS का मतलब क्या है? (What is PMS in Share market)

भारतीय शेयर बाजार में PMS का मतलब पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (Portfolio Management services) है। इसे हिंदी में पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा कहते हैं। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस या PMS Investors को उनके वित्तीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करता है और निवेश से संबंधित समाधान प्रदान करता है।

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यह पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस निवेशकों के लिए अलग-अलग प्रकार के Investment Options में निवेश पोर्टफोलियो का निर्माण करता है और साथ ही उसका ध्यान भी रखता है। इसके साथ ही PMS निवेशक के Risk Profile और निवेश के उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करके उन्हें समय के साथ मिलने वाले रिटर्न को अधिक करने में मदद भी करता है। 

PMS खासकर कई High Net worth वाले लोगो जैसे – HNI, HUFs, Partnership Firms, NRIs, Association of person, Sole Proprietorship आदि में काफी ज्यादा लोकप्रिय है। 

यानी कि जब कोई ऐसे निवेशक होते हैं जिनका High Net worth होता है और उनके पास ट्रेडिंग करने के लिए कम समय और कम ज्ञान होता है तो वे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस को चुनते हैं और अधिक रिटर्न कमाते हैं। 

भारत में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस के प्रकार (Types of Portfolio Management Services in India)

भारत में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस के प्रकार (Types of Portfolio Management Services in India)
Types of Portfolio Management Services in India

भारत में या पोर्टफोलियो सर्विस वित्तीय विभागों पर आधारित है और या निवेशकों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 4 प्रकार से कार्य करता है। PMS के चार प्रकार नीचे बताए गए हैं।

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  1. एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट 

एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट Investors को ज्यादा रिटर्न देने पर फोकस करता है और बहुत ही सक्रिय रूप से Investment पोर्टफोलियो का मैनेजमेंट करता है। जो निवेशक अधिक जोखिम लेकर ज्यादा कैपिटल गेन करना चाहते हैं वह एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का चुनाव करते हैं। 

एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कुछ Undervalued Stock को चुनता है और जब उनका प्राइस हाई हो जाता है तो उसे बेच देता है। 

  1. पैसिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट

पैसिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट इंडेक्स फंड पर ध्यान देता है और nifty50 जैसे मार्केट इंडेक्स को नकल करने की कोशिश करता है। यह फंड मैनेजर स्टॉक मार्केट इंडेक्स पोर्टफोलियो को ट्रैक करता है और निवेशकों को ज्यादा रिटर्न देता है। 

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पैसिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की लेनदेन लागत कम होती है क्योंकि यह एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की तरह निवेशक के पोर्टफोलियो में बार-बार बदलाव नहीं करता है। 

  1. Discretionary पोर्टफोलियो मैनेजमेंट 

इसे विवेकाधीन पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कहते हैं। क्योंकि यह कैसा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट है जिसका Investors के पोर्टफोलियो पर पूरा कंट्रोल होता है और यह पोर्टफोलियो मैनेजर ही Investment के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सभी तरह की स्ट्रेटजी को अपनाता है।

इस मैनेजमेंट के अंतर्गत निवेशक के पास Investment से संबंधित फैसले लेने का ज्यादा हक नहीं होता है जबकि निवेश से संबंधित सभी फैसले पोर्टफोलियो मैनेजर ही लेता है। 

  1. Non-discretionary पोर्टफोलियो मैनेजमेंट

इस पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के अंतर्गत पोर्टफोलियो मैनेजर Investors को केवल निवेश के सुझाव देता है और जब Investors उस सुझाव को मान लेता है तभी पोर्टफोलियो मैनेजर उस Investment को Execute करता है। 

यहां पर पोर्टफोलियो मैनेजर अपने इन्वेस्टर को अलग-अलग प्रकार के Strategies के बारे में जानकारी देता है और इन्वेस्टर जिस भी Strategies का चुनाव करता है उसी के अनुसार यह पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कार्य करता है।

पोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के क्या उद्देश्य हैं? (What are the objectives of Polio Management Services?)

  • पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस का उद्देश्य निवेशकों के लिए Capital appreciation करना है, जिससे कि कई निवेशक आसानी से अपने पोर्टफोलियो से अधिक रिटर्न अर्जित कर पाए।
  • ऐसे मैनेजमेंट सर्विस का मुख्य उद्देश्य निवेशकों की पूंजी की सुरक्षा करना है और उन्हें स्थिर आय प्रदान करना है।
  • कई निवेशक यह चाहते हैं कि वे अपने Investment को जल्द से जल्द Cash में बदल पाए। इसके लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट इनकी सहायता करता है और Investors के लिए एक Customize Portfolio का निर्माण करता है।
  • PMS का उद्देश्य Tax Planning करना भी है ताकि Investment के बाद Tax Return को बढ़ाया जा सके। यानी कि PMS निवेश से टैक्स कटने के बाद भी पूंजी में वृद्धि करता है और दोहरा लाभ प्रदान करता है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएस खाता क्या है?

जब निवेशक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस का लाभ उठाना चाहता है तो उसे एक PMS खाते की आवश्यकता होती है। जिस तरह से शेयर बाजार में डीमैट अकाउंट की आवश्यकता होती है उसी प्रकार यहां पर PMS अकाउंट की जरूरत होती है।

भारत में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज कैसे शुरू करें?

निवेशक एक नियामक संस्था में अपना पंजीकरण करवा कर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस शुरू कर सकता है। यह जानकारी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज रेगुलेशन सेबी 1993 में दी गई है।

क्या पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज अच्छी है?

जी हां, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज उन Investors के लिए सबसे अच्छी है जिन्हें शेयर मार्केट से संबंधित कम जानकारियां हैं और उनके पास ट्रेडिंग पर ध्यान देने के लिए ज्यादा समय नहीं है।

भारत में कितने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज है?

भारत में कुल 365 Portfolio Management Services की कंपनियां है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने what is pms in share market के बारे में जानकारी प्राप्त की। उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज से संबंधित सभी जानकारियां मिल पाई होगी। यदि आप शेयर मार्केट से संबंधित और जानकारियां पाना चाहते हैं तो हमें कमेंट करके बताएं।

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